वार, तिथि और नक्षत्र क्या हैं?
वार सप्ताह का दिन है। हर वार का एक स्वामी ग्रह है: रविवार सूर्य का, सोमवार चंद्रमा का, मंगलवार मंगल का, बुधवार बुध का, गुरुवार बृहस्पति का, शुक्रवार शुक्र का और शनिवार शनि का। पंचांग में वार सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है।
तिथि चंद्र दिन है। अमावस्या से पूर्णिमा तक के पंद्रह दिन शुक्ल पक्ष और पूर्णिमा से अमावस्या तक के पंद्रह दिन कृष्ण पक्ष कहलाते हैं। व्रत और त्योहार प्रायः उस तिथि से तय होते हैं जो सूर्योदय के समय चल रही हो।
नक्षत्र वह तारा-समूह है जिसमें चंद्रमा उस समय है। कुल 27 नक्षत्र हैं और चंद्रमा लगभग एक दिन में एक नक्षत्र पार करता है। शुभ मुहूर्त, नामकरण और विवाह मिलान में नक्षत्र देखा जाता है।
तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण मिलकर पंचांग के पाँच अंग बनाते हैं। ये सभी समय चुने गए शहर के सूर्योदय से निकाले गए हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आज कौन सा वार है?
ऊपर दिया गया वार आज का है। हिंदू पंचांग में वार सूर्योदय से बदलता है, आधी रात से नहीं; इसलिए रात 12 बजे के बाद और सूर्योदय से पहले पंचांग के अनुसार पिछला वार ही चलता है।
आज की तिथि कैसे तय होती है?
तिथि चंद्रमा और सूर्य के बीच की दूरी से बनती है: हर 12 अंश पर एक तिथि। जो तिथि सूर्योदय के समय चल रही होती है, वही उस दिन की तिथि (उदया तिथि) मानी जाती है, भले ही वह दिन में बदल जाए।
तिथि दिन के बीच में क्यों बदल जाती है?
तिथि की लंबाई लगभग 19 से 26 घंटे तक होती है और यह किसी भी समय शुरू या ख़त्म हो सकती है। इसीलिए हर तिथि के साथ उसके ख़त्म होने का समय और अगली तिथि दी गई है।
क्या हर शहर में तिथि एक जैसी होती है?
तिथि बदलने का क्षण पूरी दुनिया में एक ही होता है, लेकिन सूर्योदय हर शहर में अलग समय पर होता है। इसलिए कभी-कभी दो शहरों में उदया तिथि अलग हो जाती है। ऊपर अपना शहर चुनें।
पूर्णिमांत और अमांत माह में क्या अंतर है?
उत्तर भारत में महीना पूर्णिमा के बाद बदलता है (पूर्णिमांत), जबकि महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत में अमावस्या के बाद (अमांत)। शुक्ल पक्ष में दोनों का नाम एक ही रहता है, कृष्ण पक्ष में पूर्णिमांत माह एक आगे होता है।