अहोई अष्टमी 2026 रविवार, 1 नवंबर को है। माताएँ संतान की लंबी आयु और सुख के लिए सूर्योदय से निर्जला व्रत रखती हैं और शाम को तारे देखकर व्रत खोलती हैं (कुछ परिवार चांद का इंतज़ार करते हैं)। इस साल इस दिन रवि पुष्य योग भी है, जो साल के सबसे शुभ योगों में से एक है। दिल्ली में तारे लगभग शाम 6:00 बजे दिखेंगे।
तारे और चंद्रोदय का समय NavAstro के अपने खगोलीय इंजन से हर शहर के लिए निकाला गया है, द्रिक पंचांग वाली पद्धति से (दिल्ली चंद्रोदय रात 11:40)। समय IST में हैं।
अहोई अष्टमी 2026: एक नज़र में
| समय (नई दिल्ली) | |
|---|---|
| तिथि | रविवार, 1 नवंबर 2026 |
| अष्टमी तिथि | 1 नवंबर दोपहर 2:54 से 2 नवंबर दोपहर 1:12 तक |
| पूजा मुहूर्त | लगभग शाम 5:36 से 6:54 तक |
| तारे देखने का समय | लगभग शाम 6:00 बजे |
| चंद्रोदय | रात 11:40 बजे |
| रवि पुष्य योग | सूर्योदय (सुबह 6:33) से 2 नवंबर सुबह लगभग 4:30 तक |
कार्तिक कृष्ण अष्टमी (पूर्णिमांत) 1 नवंबर की दोपहर शुरू होकर शाम तक रहती है, जब पूजा होती है, इसलिए व्रत 1 नवंबर को है। यह दिवाली से आठ दिन पहले और करवा चौथ के चार दिन बाद आती है।
अहोई अष्टमी पर रवि पुष्य योग
जब रविवार को पुष्य नक्षत्र हो, तो रवि पुष्य योग बनता है। पुष्य 27 नक्षत्रों में सबसे पोषक माना जाता है: इसके स्वामी शनि और देवता बृहस्पति हैं। यह योग परंपरागत रूप से सोना खरीदने, पढ़ाई शुरू करने और बढ़ने वाले किसी भी काम की शुरुआत के लिए शुभ माना जाता है। संतान के कल्याण के व्रत पर यह योग पड़ना कई परिवारों के लिए विशेष शुभ है। पंचांगों के अनुसार यह 1 नवंबर सूर्योदय से 2 नवंबर सुबह लगभग 4:30 तक है। दिन का पंचांग योग साध्य है, जो दोपहर में शुभ योग में बदलता है।
आपके शहर में तारे और चंद्रोदय का समय
| शहर | तारे | चंद्रोदय | शहर | तारे | चंद्रोदय | |
|---|---|---|---|---|---|---|
| दिल्ली | 6:00 PM | 11:40 PM | आगरा | 5:58 PM | 11:40 PM | |
| नोएडा | 5:59 PM | 11:40 PM | पटना | 5:32 PM | 11:13 PM | |
| गुरुग्राम | 6:01 PM | 11:42 PM | कोलकाता | 5:22 PM | 11:05 PM | |
| फरीदाबाद | 6:00 PM | 11:40 PM | भोपाल | 6:05 PM | 11:49 PM | |
| गाज़ियाबाद | 5:59 PM | 11:39 PM | इंदौर | 6:12 PM | 11:57 PM | |
| चंडीगढ़ | 5:59 PM | 11:38 PM | अहमदाबाद | 6:24 PM | 12:10 AM* | |
| अमृतसर | 6:06 PM | 11:44 PM | मुंबई | 6:27 PM | 12:15 AM* | |
| लुधियाना | 6:03 PM | 11:42 PM | पुणे | 6:24 PM | 12:12 AM* | |
| देहरादून | 5:55 PM | 11:34 PM | हैदराबाद | 6:06 PM | 11:55 PM | |
| जयपुर | 6:08 PM | 11:50 PM | बेंगलुरु | 6:14 PM | 12:06 AM* | |
| लखनऊ | 5:47 PM | 11:28 PM | चेन्नई | 6:04 PM | 11:54 PM | |
| कानपुर | 5:50 PM | 11:31 PM | वाराणसी | 5:40 PM | 11:23 PM |
* आधी रात के ठीक बाद, यानी 2 नवंबर की सुबह।
"तारे" का समय गोधूलि (civil twilight) के अंत का है, जब सूर्य क्षितिज से 6° नीचे होता है और पहले चमकीले तारे दिखते हैं। धुंध हो तो कुछ मिनट और लग सकते हैं।
पूजा विधि
- सुबह: स्नान के बाद संकल्प; व्रत आमतौर पर निर्जला होता है।
- पूजा से पहले: दीवार पर स्याहू (साही) और सात पुत्रों सहित अहोई माता का चित्र बनाया जाता है या चित्र रखा जाता है; पास में जल से भरा करवा रखा जाता है, अक्सर करवा चौथ वाला ही।
- पूजा मुहूर्त में: रोली, चावल, दूध और मिठाई से अहोई माता की पूजा और अहोई अष्टमी की कथा। कई माताएँ स्याहू माला पहनती हैं और हर संतान के लिए एक मनका जोड़ती हैं।
- तारे दिखने पर: करवे के जल से तारों को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है। जो परिवार चांद का इंतज़ार करते हैं, वे चंद्रोदय के बाद व्रत खोलते हैं।
ब्रज में संतान की कामना रखने वाले दंपती अहोई अष्टमी की आधी रात को गोवर्धन के पास राधा कुंड में स्नान करते हैं; हर साल यहाँ भारी भीड़ होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2026 में अहोई अष्टमी कब है? रविवार, 1 नवंबर 2026।
अहोई अष्टमी 2026 पर तारे कितने बजे निकलेंगे? दिल्ली में लगभग शाम 6:00 बजे; अपने शहर का समय तालिका में देखें।
क्या अहोई अष्टमी 2026 पर कोई विशेष योग है? हाँ। रविवार को पुष्य नक्षत्र से रवि पुष्य योग बनता है, सूर्योदय से 2 नवंबर सुबह लगभग 4:30 तक।
क्या तारों की जगह चांद देखकर व्रत खोल सकते हैं? हाँ, कुछ परिवार चांद का इंतज़ार करते हैं। चांद देर से निकलता है (दिल्ली में रात 11:40), इसलिए अधिकांश लोग तारे देखकर व्रत खोलते हैं।
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समय शहर के केंद्र के लिए निकाले गए हैं; कुछ मिनट का अंतर सामान्य है। पूजा अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार करें। यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है।